बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमें पीड़ित व्यक्ति के anus ( गुदा द्वार) के अंदर और बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है। जिसकी वजह से एनस अंदरूनी हिस्से या बाहर के हिस्से में स्किन जमाकर होकर मस्से जैसी बन जाती है और इसमें से कई बार खून निकलने के साथ ही दर्द भी होता है।
बवासीर एक ऐसी बीमारी है जिसमें पीड़ित व्यक्ति के anus ( गुदा द्वार) के अंदर और बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है। जिसकी वजह से एनस अंदरूनी हिस्से या बाहर के हिस्से में स्किन जमाकर होकर मस्से जैसी बन जाती है और इसमें से कई बार खून निकलने के साथ ही दर्द भी होता है। मल त्याग के दौरान जोर लगाने पर ये मस्से बाहर आ जाते हैं। इस समस्या के कारण व्यक्ति को बैठने में भी दिक्कत होती है। कई बार शर्मिंदगी के कारण लोग शुरुआत में इस पर ध्यान नहीं देते जिससे बाद में समस्या बढ़ जाती है।
कब्ज की समस्या। कब्ज के कारण पेट साफ नहीं होता है और मल त्याग में जोर लगाना पड़ता है जिसकी वजह से पाइल्स की समस्या हो जाती है।
जो लोग ज़्यादा देर तक खड़े होकर या बैठकर काम करते हैं, उन्हें भी बवासीर की समस्या हो जाती है।
पाइल्स का एक कारण मोटापा भी है।
प्रेग्नेंसी के दौरान भी कई महिलाओं को पाइल्स की समस्या हो जाती है।
डिलीवरी के बाद भी यह समस्या हो सकती है।
यदि परिवार में किसी को बवासीर है, तो आपको इसे होने का खतरा बढ़ जाता है।
मल त्याग के समय या बाद में दर्द होना।
गुदा द्वार के आसपास सूजन या गांठ जैसे होना।
गुदा द्वार के आसपास खुजली होना।
मल त्याग के बाद भी ऐसा लगना कि पेट साफ नहीं हुआ है।
पाइल्स के मस्सों से सिर्फ खून आना।
बवासीर दो प्रकार की होती हैं, जो ये हैंः-
01 खूनी बवासीर
खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते हैं। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के रूप में आने लगता है।
मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते।
02 बादी बवासीर
बादी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता। यह मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं। इनमें बार-बार खुजली एवं जलन होती है। शुरुआती अवस्था में यह तकलीफ नहीं देते, लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। इनमें खून जमा हो जाता है, और सूजन हो जाती है।
इसमें भी असहनीय पीड़ा होती है, और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। मलत्याग करते समय, और उसके बाद भी रोगी को दर्द बना रहता है। वह स्वस्थ तरह से चल-फिर नहीं पाता, और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है।
बाथ टब (Sitz bath) में गर्म पानी डालकर 10-15 मिनट तक बैठें। यह बवासीर के दर्द, और जलन से आराम पाने का सबसे अच्छा इलाज है
अधिक फाइबरयुक्त आहार का सेवन करें, जैसे- रेशेदार फल एवं सब्जियाँ।
रोजाना 7-8 गिलास पानी पिएं।
भोजन में नियमित रूप से छाछ का सेवन करें।
बवासीर का इलाज केवल सर्जरी ही है, यह सच नहीं है। ऐसा देखा गया है कि सर्जरी के बाद भी दोबारा बवासीर हो जाता है। समय पर किए गए सही उपचार, एवं बेहतर जीवनशैली से इस रोग को ठीक किया जा सकता है।
© 2022 Dr. Nazar’s Multispeciality Homeopathic.
Can I help you?