Ovary Cyst

महिलाओं में यूटेरस के दोनों तरफ दो अंडाशय यानि 2 ओवरी होती हैं कभी कभी ओवेरी की भीतरी सतहों पर पानी से भरी थैलियाँ बन जाती हैं जिन्हे Ovarian cyst कहते हैं।

Ovarian Cyst

महिलाओं में यूटेरस के दोनों तरफ दो अंडाशय यानि 2 ओवरी होती हैं  कभी कभी ओवेरी की भीतरी सतहों पर पानी से भरी थैलियाँ बन जाती हैं जिन्हे Ovarian cyst कहते हैं।

यह माना जाता है कि ज्यादातर महिलाओं को उनके जीवन काल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। यदि सिस्ट का उपचार नहीं किया जाए तो पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम हो जाता है अर्थात् ओवरी में अधिक संख्या में छोटे-छोटे सिस्ट हो जाते हैं। जिसके फलस्वरूप अंडाशय बढ़ जाता है। यदि इसका उपचार नहीं किया जाए तो पॉलिसिस्टिक ओवरी से बांझपन भी हो सकता है।

ओवेरियन सिस्ट क्यों होता है?

   ओवेरियन सिस्ट होने के सबसे आम कारणों में निम्न शामिल हैं:

हार्मोनल समस्याएं

ऐसा हार्मोनल समस्याओं के कारण हो सकता है या आपको ओवुलेट करने में मदद करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के कारण हो सकता है।

गर्भावस्था

ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर प्रारंभिक गर्भावस्था में विकसित होती है ताकि गर्भावस्था का समर्थन करने में मदद मिल सके जब तक कि नाल न बन जाए। कभी-कभी, गर्भावस्था के बाद तक सिस्ट ओवरी पर रहती है और इसे निकलने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाएं एक प्रकार का ओवेरियन सिस्ट विकसित कर सकती हैं जिसे एंडोमेट्रियोमा कहा जाता है। एंडोमेट्रियोसिस ऊतक आपकी ओवरी से जुड़ कर सिस्ट का निर्माण कर सकता है। ये सिस्ट सेक्स के दौरान और मासिक धर्म के दौरान दर्दनाक हो सकते हैं।

गंभीर पैल्विक संक्रमण

गंभीर संक्रमण या इन्फेक्शन ओवरी और फैलोपियन ट्यूब में फैल सकता है और आपकी ओवरी में सिस्ट के गठन का कारण बन सकता है।

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण – Symptoms of Ovarian Cyst

ओवरी के सिस्ट में कोई लक्षण अनुभव नहीं होते हैं। परन्तु जैसे-जैसे सिस्ट बढ़ता है वैसे-वैसे इसके लक्षणों में भी वृद्धि होती जाती है। कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं :

01 पेट में सूजन या पेट का फूला हुआ महसूस होना

03 मासिक धर्म चक्र से पहले या दौरान पैल्विक दर्द

05 पीठ के निचले हिस्से या जांघों में दर्द

02 मल त्याग करते समय दर्द महसूस होना

04 संभोग के दौरान दर्द

06 स्तनों में दर्द

07 बुखार आना

09 तेज-तेज सांस लेना

11 अपच

08 बेहोशी या चक्कर आना

10 जी मिचलाना या उल्टी का आभास

12 मूत्र तत्कालता

13 थकान और कमजोरी महसूस होना

15 कब्ज होना

14 अनियमित मासिक धर्म

ओवरियन सिस्ट से बचाव के उपाय (How to Prevent Ovarian Cyst)

आम तौर पर भोजन और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाने  पर ओवरियन सिस्ट से बचा जा सकता है। जैसे-

रोजाना प्राणायाम और योगाभ्यास करें।

प्रोटीन को अपनी डायट में शामिल करें।

घर में बनाए गए व्यंञ्जनों का सेवन करें।

रेशेदार फलों का सेवन करें।

हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।

भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें।

रात को जल्दी सोने का अभ्यास करें ताकि प्रात:काल जल्दी उठें।

इन खाद्य पदार्थों से करें परहेज

food syst

1. डिब्बा बन्द भोजन का प्रयोग न करें।
2. पिज्जा, बर्गर आदि खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
3. पेप्सी, कोक आदि ड्रिंक्स न लें।
4. मैदे से बनी चीजों का सेवन न करें।
5. ज्यादा तेल में तली चीजों का सेवन न करें।
6. रात को सोने से पहले भारी भोजन का सेवन न करें।
7. समय पर भोजन का सेवन करें।
8. फास्ट फूड, जंक फूड का त्याग करें।
9. पेप्सी, कोक, मिरिंडा आदि पेय पदार्थों को त्याग कर फ्रेश जूस का सेवन करें।
10. मैदे से बने व्यंञ्जनो को न खाएँ।
11. मिर्च, मसालेदार भोजन का सेवन न करें।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए (When to Contact a Doctor)

ओवरियन सिस्ट पर कब डॉक्टर से मिलने जाना चाहिए अक्सर महिलाओं को समझ में नहीं आता है। जब ये लक्षण महसूस होने पर बिना देर किये डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

  • जब आपको पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द और भारीपन महसूस हो
  • चुभन हो
  • पीरियड्स का अनियमित और अधिक मात्रा में ब्लीड़िंग होना
  • जब आपको व्यायाम या सहवास के बाद पेल्विक क्षेत्र में दर्द महसूस हो
  • जी मिचलाना।
  • वैजाइना में दर्द की अनुभूति

Homeopathic Treatment

अगर आप एलोपैथिक डाक्टर के पास जाते है तो आपको डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते है।और यदि आपको भी ऑपरेशन की सलाह दी गई है तो एक बार अच्छे होम्योपैथिक चिकित्सक से जरूर सलाह ले ले। क्योंकि होम्योपैथी में ओवरी सिस्ट या pcod का बहुत अच्छा ईलाज है।होम्योपैथिक डाक्टर आपका पूरा केस लेकर आपके लक्षण के हिसाब से दवा का चुनाव करता है जो उसके ओवरी सिस्ट या pcod को पूरी तरह से ठीक कर देता है