महिलाओं में यूटेरस के दोनों तरफ दो अंडाशय यानि 2 ओवरी होती हैं कभी कभी ओवेरी की भीतरी सतहों पर पानी से भरी थैलियाँ बन जाती हैं जिन्हे Ovarian cyst कहते हैं।
महिलाओं में यूटेरस के दोनों तरफ दो अंडाशय यानि 2 ओवरी होती हैं कभी कभी ओवेरी की भीतरी सतहों पर पानी से भरी थैलियाँ बन जाती हैं जिन्हे Ovarian cyst कहते हैं।
यह माना जाता है कि ज्यादातर महिलाओं को उनके जीवन काल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। यदि सिस्ट का उपचार नहीं किया जाए तो पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम हो जाता है अर्थात् ओवरी में अधिक संख्या में छोटे-छोटे सिस्ट हो जाते हैं। जिसके फलस्वरूप अंडाशय बढ़ जाता है। यदि इसका उपचार नहीं किया जाए तो पॉलिसिस्टिक ओवरी से बांझपन भी हो सकता है।
ओवेरियन सिस्ट होने के सबसे आम कारणों में निम्न शामिल हैं:
ऐसा हार्मोनल समस्याओं के कारण हो सकता है या आपको ओवुलेट करने में मदद करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के कारण हो सकता है।
ओवेरियन सिस्ट आमतौर पर प्रारंभिक गर्भावस्था में विकसित होती है ताकि गर्भावस्था का समर्थन करने में मदद मिल सके जब तक कि नाल न बन जाए। कभी-कभी, गर्भावस्था के बाद तक सिस्ट ओवरी पर रहती है और इसे निकलने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाएं एक प्रकार का ओवेरियन सिस्ट विकसित कर सकती हैं जिसे एंडोमेट्रियोमा कहा जाता है। एंडोमेट्रियोसिस ऊतक आपकी ओवरी से जुड़ कर सिस्ट का निर्माण कर सकता है। ये सिस्ट सेक्स के दौरान और मासिक धर्म के दौरान दर्दनाक हो सकते हैं।
गंभीर संक्रमण या इन्फेक्शन ओवरी और फैलोपियन ट्यूब में फैल सकता है और आपकी ओवरी में सिस्ट के गठन का कारण बन सकता है।
ओवरी के सिस्ट में कोई लक्षण अनुभव नहीं होते हैं। परन्तु जैसे-जैसे सिस्ट बढ़ता है वैसे-वैसे इसके लक्षणों में भी वृद्धि होती जाती है। कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं :
01 पेट में सूजन या पेट का फूला हुआ महसूस होना
03 मासिक धर्म चक्र से पहले या दौरान पैल्विक दर्द
05 पीठ के निचले हिस्से या जांघों में दर्द
02 मल त्याग करते समय दर्द महसूस होना
04 संभोग के दौरान दर्द
06 स्तनों में दर्द
07 बुखार आना
09 तेज-तेज सांस लेना
11 अपच
08 बेहोशी या चक्कर आना
10 जी मिचलाना या उल्टी का आभास
12 मूत्र तत्कालता
13 थकान और कमजोरी महसूस होना
15 कब्ज होना
14 अनियमित मासिक धर्म
आम तौर पर भोजन और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाने पर ओवरियन सिस्ट से बचा जा सकता है। जैसे-
1. डिब्बा बन्द भोजन का प्रयोग न करें। 2. पिज्जा, बर्गर आदि खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। 3. पेप्सी, कोक आदि ड्रिंक्स न लें। 4. मैदे से बनी चीजों का सेवन न करें। 5. ज्यादा तेल में तली चीजों का सेवन न करें। 6. रात को सोने से पहले भारी भोजन का सेवन न करें। 7. समय पर भोजन का सेवन करें। 8. फास्ट फूड, जंक फूड का त्याग करें। 9. पेप्सी, कोक, मिरिंडा आदि पेय पदार्थों को त्याग कर फ्रेश जूस का सेवन करें। 10. मैदे से बने व्यंञ्जनो को न खाएँ। 11. मिर्च, मसालेदार भोजन का सेवन न करें।
ओवरियन सिस्ट पर कब डॉक्टर से मिलने जाना चाहिए अक्सर महिलाओं को समझ में नहीं आता है। जब ये लक्षण महसूस होने पर बिना देर किये डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
अगर आप एलोपैथिक डाक्टर के पास जाते है तो आपको डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते है।और यदि आपको भी ऑपरेशन की सलाह दी गई है तो एक बार अच्छे होम्योपैथिक चिकित्सक से जरूर सलाह ले ले। क्योंकि होम्योपैथी में ओवरी सिस्ट या pcod का बहुत अच्छा ईलाज है।होम्योपैथिक डाक्टर आपका पूरा केस लेकर आपके लक्षण के हिसाब से दवा का चुनाव करता है जो उसके ओवरी सिस्ट या pcod को पूरी तरह से ठीक कर देता है
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